मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किन्नारपु राममोहन नायडू ने किया सम्मेलन का उद्घाटन

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यह सम्मेलन क्षेत्रीय नागरिक उड्डयन सम्मेलनों की श्रृंखला की शुरुआत है, जिसका उद्देश्य केंद्र-राज्य-उद्योग के सहयोग को गहरा करना है। उद्घाटन सत्र में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री  किन्नारपु राममोहन नायडू ने कहा, “इस रणनीतिक पहल के माध्यम से हमारा उद्देश्य क्षेत्रीय अवसरों की पहचान करना और द्वितीय एवं तृतीय श्रेणी के शहरों की अपार क्षमता को साकार करना है। यदि हम केवल आँकड़ों को देखें, तो यह अवसर स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है — पिछले 10 वर्षों में हमने 88 नए हवाई अड्डे जोड़े हैं, अर्थात् लगभग हर 40 दिन में एक नया हवाई अड्डा। प्रतिघंटा 60 अतिरिक्त उड़ानों की बढ़ोतरी हुई है। आज भारत में उड़ान अधिक सुलभ, उपलब्ध और किफायती हो चुकी है। माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय आकाश अधिक जुड़ा हुआ, प्रतिस्पर्धी और सहयोगी बन चुका है।”

उन्होंने समावेशी विमानन विकास के लिए राज्य-विशिष्ट रणनीतियों और सहयोगात्मक दृष्टिकोण के प्रति मंत्रालय की प्रतिबद्धता दोहराई।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, जो सम्मेलन के मुख्य अतिथि थे, ने उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि नागरिक उड्डयन क्षेत्र राज्य में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, पर्यटन और सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने नागरिक उड्डयन क्षेत्र में हो रही प्रगति की सराहना की और राज्य की पहाड़ी भू-भागों में हेलीकॉप्टर संचालन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की महत्ता को रेखांकित किया, जिसके लिए राज्य सरकार और मंत्रालय दोनों प्रतिबद्ध हैं।

सम्मेलन में गौतम कुमार डाक, राज्य मंत्री (सहकारिता और नागरिक उड्डयन), राजस्थान सरकार; विपुल गोयल, मंत्री (राजस्व, आपदा प्रबंधन, शहरी स्थानीय निकाय एवं नागरिक उड्डयन), हरियाणा सरकार; सुबोध उनियाल, वन मंत्री, उत्तराखंड सरकार; सुरेश कुमार खन्ना, मंत्री (वित्त एवं संसदीय कार्य), उत्तर प्रदेश सरकार; तथा रघुबीर सिंह बाली, उपाध्यक्ष, हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास बोर्ड सहित राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

मंत्रालय द्वारा राज्यों के लिए उपलब्ध अवसरों पर प्रस्तुतियों के पश्चात, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किन्नारपु राममोहन नायडू के नेतृत्व में राज्य सरकारों के प्रतिनिधिमंडलों और मंत्रालय के अधिकारियों के मध्य एक-से-एक बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों ने राज्यों को अपनी आवश्यकताओं और सुझावों को सीधे मंत्रालय के समक्ष रखने का एक अनूठा अवसर प्रदान किया। साथ ही, राज्य सरकारों ने विमानन उद्योग के प्रमुख हितधारकों (एयरलाइंस, OEMs, FTOs, MROs और AAI, PHL जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों) से भी सीधे चर्चा की।
सम्मेलन के अंत में आयोजित प्लेनरी सत्र ने पूरे दिन हुई चर्चाओं और निष्कर्षों का समावेश करते हुए एक समग्र दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। केंद्रीय मंत्री श्री नायडू ने उत्तर क्षेत्र के लिए मंत्रालय की रणनीतिक प्राथमिकताओं पर प्रकाश डाला — जैसे हेलीपोर्ट अवसंरचना का विकास, UDAN मार्गों का विस्तार, फ्लाइंग ट्रेनिंग संस्थानों और MRO हब्स को सुदृढ़ करना, और केंद्र-राज्य-उद्योग के बीच समन्वय बढ़ाना। उन्होंने एक-से-एक बैठकों और उद्योग सत्रों में प्राप्त सुझावों और आवश्यकताओं पर भी विचार साझा किया तथा क्षेत्र में विमानन क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार की पूर्ण प्रतिबद्धता जताई।

प्लेनरी सत्र में यह पुष्टि हुई कि भारत सरकार उत्तर क्षेत्र में मजबूत, समावेशी और भविष्य-उन्मुख नागरिक उड्डयन पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है— जो विक्सित भारत @2047 की व्यापक दृष्टि को बेहतर कनेक्टिविटी, क्षेत्रीय सशक्तिकरण और सतत विकास के माध्यम से साकार करेगा। यह सम्मेलन भारत की उड्डयन यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है — जो क्षेत्रीय सहयोग, नवाचार और विकास के एक नए युग की शुरुआत करता है, स्पष्ट कार्य योजनाओं, केंद्र-राज्य समन्वय और सक्रिय उद्योग भागीदारी के साथ।

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